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सम्पादकीय

विश्व कैंसर दिवस-आवश्यकता है कैंसर के खिलाफ इस युद्ध में  साथ खड़े होने की
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विश्व कैंसर दिवस-आवश्यकता है कैंसर के खिलाफ इस युद्ध में साथ खड़े होने की

February 4th, 2017 | by admin
आज विश्व कैंसर दिवस है | आज मेडिकल साइंस के इतने विकास के बाद भी कैंसर एक ऐसे बिमारी है | जिसका नाम भी भयभीत... Read more
भारत के गौरवशाली इतिहास को मिथक बताने की कवायद
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भारत के गौरवशाली इतिहास को मिथक बताने की कवायद

January 31st, 2017 | by admin
संजय लीला भंसाली और करणी सेना विवाद के बाद तमाम फेसबुक पोस्ट पढने के बाद बहुत अजीब लगा जब एक स्त्री के... Read more
चलो थाम लें एक दूसरे का हाथ …………… की उड़ना है दूर तक
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चलो थाम लें एक दूसरे का हाथ …………… की उड़ना है दूर तक

January 1st, 2017 | by admin
वंदना बाजपेयी जब धरती पर खोली थी मैंने आँखें तब थी मेरी बंद मुट्ठियाँ जिसमें कैद था पूरा आसमान हुलस कर देखा... Read more
अखिलेश की वापसी – जातिवाद से विकासवाद की और बढता उत्तर प्रदेश
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अखिलेश की वापसी – जातिवाद से विकासवाद की और बढता उत्तर प्रदेश

December 31st, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी आज की बड़ी ख़बरों में समाजवादी पार्टी में मची आपसी कलह की समाप्ति है । अखिलेश यादव और राम गोपाल... Read more
नकाब घूँघट और टैटू:   जब महिलाओ को  बदसूरत दिखने के लिए बनवाने पड़ते थे चेहरे पर टैटू …. पर क्यों ?
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नकाब घूँघट और टैटू: जब महिलाओ को बदसूरत दिखने के लिए बनवाने पड़ते थे चेहरे पर टैटू …. पर क्यों ?

December 30th, 2016 | by admin
नकाब घूँघट और टैटू |हालांकि आपको ये तीनों बेमेल दिख रहे होंगे | कुछ लोग इसे धर्म से जोड़ने का प्रयास भी कर... Read more
नारी मन – ” क्या मेरी रजा की जरूरत नहीं थी ?
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नारी मन – ” क्या मेरी रजा की जरूरत नहीं थी ?

December 29th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी उफ़ ! क्या दिन थे वो | जब बनी थी तुम्हारी शरीके हयात | तुम्हारे जीवन में भरने को रंग सुर्ख जोड़े... Read more
कब तक मारी जाती रहेंगी बेटियाँ ? – पिता ने माँ के हाथ से छीन कर नवजात बेटी को नदी में बहाया
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कब तक मारी जाती रहेंगी बेटियाँ ? – पिता ने माँ के हाथ से छीन कर नवजात बेटी को नदी में बहाया

December 23rd, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी एक तरफ सरकार बेटी बचाओं आन्दोलन चला रही है | सोशल मीडिया पर भी इसका जोर शोर से प्रचार हो रहा है... Read more
क्यों दिल को सुकून देता है झूठ
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क्यों दिल को सुकून देता है झूठ

November 29th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी झूठ यह नाम सुनते ही हमें अपने जीवन के तमाम धोखेबाज , फरेबी और मक्कार चेहरे नज़र आने लगते हैं |... Read more
सोनम ,आयशा या एरिका – महिलाओं की सरेआम बेज्जती को कब तक मजाक समझते रहेंगे हम
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सोनम ,आयशा या एरिका – महिलाओं की सरेआम बेज्जती को कब तक मजाक समझते रहेंगे हम

November 28th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी अभी कुछ दिन पहले जब सोशल मीडिया देश नोट बंदी जैसे गंभीर मुद्दे पर उलझा हुआ था | हर चौथी पोस्ट... Read more
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