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बसंत गीत

February 17th, 2016 | by admin
बसंत गीत
कवितायें
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जयन्ती प्रसाद शर्मा

आ गये ऋतुराज बसंत।
गत शिशिर हुआ,विगत हेमन्त…………आ गये ऋतुराज बसंत…।
मौसम हो गया खुशगवार,
बहने लगी सुरभित बयार,
कोयल कूक रही मतवाली,
हुई पल्लवित डाली डाली।
गुनगुनी धुप से खिल गये तनमन, हुआ दुखों का अन्त…………आ गये ऋतुराज बसंत…।
पीले फूल खिले सरसों के,
शस्य श्यामला हो गई धरा।
मानो बसंत की आगौनी को,
प्रकृति ने श्रृंगार करा।
हर मन में उत्साह भर गया-
जवान हो गई मन की उमंग…………आ गये ऋतुराज बसंत…।
कामदेव ने काम किया,
पुष्प शर संधान किया।
फूलों की मोहक सुगंध से-
सम्मोहित संसार किया।
सब प्राणी मदमस्त हो गये नस नस में घुस गया अनंग…………आ गये ऋतुराज बसंत…।
नेह रस की हो रही वृष्टि,
हुई सिक्त सम्पूर्ण सृष्टि।
रति पति ने अधिपत्य जमाया,
अंग अंग में मदन समाया।
कुंजन मे भ्रंग कर रहे गुंजन, आनन्द छाया दिग दिगंत…………आ गये ऋतुराज बसंत…।

नाम : जयन्ती प्रसाद शर्मा
जन्म स्थान : अलीगढ
कार्य : सेवानिवृत वरिष्ठ सहायक (एन सी सी विभाग)
प्रकाशित कृतियाँ : मन के वातायन (कविता संग्रह), सूर्पणखा (खंडकाव्य), गुबार(काव्य संग्रह), )
संपर्क : jpsharma183@rediffmail.com

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