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कौन अब किसको समझायें कहां तक

June 12th, 2016 | by admin
कौन अब किसको समझायें कहां तक
शायरी
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अजय चंद्रवंशी

कौन अब किसको समझायें कहां तक
टूटते रिश्तों को बचायें कहां तक

वे हमारे दिल को समझेंगे एक दिन
ऐसी बातों से दिल बहलायें कहां तक

मुसाफिर जब चलने से इंकार कर दे
कोई किसी को राह दिखाये कहां तक

चलो अपनी-अपनी राह पर चलते हैं
तुम हमको, हम तुम्हे आजमाये कहां तक

कुछ हमारा दिल भी इंकार करता है
रह-रह के तेरे दर पर जायें कहां तक

ajay chandrvanshi

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