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सम्पादकीय

सफलता का मूल मंत्र  है सपनों में नहीं , सपनों को जीना
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सफलता का मूल मंत्र है सपनों में नहीं , सपनों को जीना

November 30th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी हां सच होते हैं सपने जो पकते हैं मन के क्षितिज पर उगते –ढलते दिन के साथ जब...
क्या आप जरूरत से जयादा व्यस्त हैं ?
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क्या आप जरूरत से जयादा व्यस्त हैं ?

November 4th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी जरूरत से ज्यादा व्यस्त के लिए एक शब्द आता है वर्कहोलिक मतलब काम –काम और...
जरूरी है मन का अँधेरा दूर होना
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जरूरी है मन का अँधेरा दूर होना

November 2nd, 2016 | by admin
ओमकार मणि त्रिपाठी प्रधान सम्पादक भारतीय संस्कृति में अक्टूबर नवम्बर माह का विशेष...
तेज दौड़ने के लिए जरूरी है धीमी रफ़्तार  /go slow to go fast
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तेज दौड़ने के लिए जरूरी है धीमी रफ़्तार /go slow to go fast

October 17th, 2016 | by admin
ओमकार मणि त्रिपाठी प्रधान संपादक एक पुरानी अंग्रेजी कहावत है ,“go slow to go fast “अगर आप आगे बढ़ना...
दुख का मूल नहीं, दुख से बाहर आने का प्रयास है संघर्ष
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दुख का मूल नहीं, दुख से बाहर आने का प्रयास है संघर्ष

October 2nd, 2016 | by admin
सीताराम गुप्ता दिल्ली जीवन के हर मोड़ पर कोई न कोई विषमता, कोई न कोई अभाव मुँह उठाए ही...
सकारात्मक सोंच : जो नहीं मिला उसे भूल जा
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सकारात्मक सोंच : जो नहीं मिला उसे भूल जा

September 29th, 2016 | by admin
सीताराम गुप्ता दिल्ली दुखों से बचने के लिए जीवन के बायोडाटा में सिर्फ़ उसे शुमार करें...
सकारात्मक चिंतन : प्रश्न यह है कि विचार संसार को चला तो रहे हैं, पर भला  क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
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सकारात्मक चिंतन : प्रश्न यह है कि विचार संसार को चला तो रहे हैं, पर भला क्यों नहीं कर पा रहे हैं?

September 27th, 2016 | by admin
– प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’, लेखक एवं समाजसेवी, लखनऊ आजकल कई हलकों से यह बुनियादी बात...
feeling lost : क्या करें , जब लगे सब खत्म हो गया है ……..
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feeling lost : क्या करें , जब लगे सब खत्म हो गया है ……..

September 24th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी आज मैं लिखने जा रही हूँ उन तमाम निराश हताश लोगों के बारे में जो जीवन में...
व्यक्तित्व विकास : काम उतना ही करो जितना की संभाल सको
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व्यक्तित्व विकास : काम उतना ही करो जितना की संभाल सको

September 18th, 2016 | by admin
वंदना बाजपेयी मेरे लेख का शीर्षक देख कर आपको अवश्य लग सकता है की personality development का लेख होते...
जीवन के विकास के लिए काम और आराम दोनों ही जरूरी हैं!
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जीवन के विकास के लिए काम और आराम दोनों ही जरूरी हैं!

September 15th, 2016 | by admin
– प्रदीप कुमार सिंह ‘पाल’, लेखक, युग शिल्पी एवं समाजसेवी, लखनऊ काम और आराम में संतुलन...
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