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शायरी

होने लगी है जिस्म में जुंबिश तो देखिये
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होने लगी है जिस्म में जुंबिश तो देखिये

April 23rd, 2016 | by admin
होने लगी है जिस्म में जुंबिश तो देखिये इस पर कटे परिंदे की कोशिश तो देखिये गूँगे निकल...
हालाते जिस्म, सूरती—जाँ और भी ख़राब
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हालाते जिस्म, सूरती—जाँ और भी ख़राब

April 23rd, 2016 | by admin
हालाते जिस्म, सूरती—जाँ और भी ख़राब चारों तरफ़ ख़राब यहाँ और भी ख़राब नज़रों में आ रहे...
ये ज़ुबाँ हमसे सी नहीं जाती… दुष्यंत कुमार
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ये ज़ुबाँ हमसे सी नहीं जाती… दुष्यंत कुमार

April 23rd, 2016 | by admin
ये ज़ुबाँ हमसे सी नहीं जाती ज़िन्दगी है कि जी नहीं जाती इन सफ़ीलों में वो दरारे हैं...
लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में- बहादुर शाह जफ़र
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लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में- बहादुर शाह जफ़र

April 18th, 2016 | by admin
लगता नहीं है जी मेरा उजड़े दयार में किस की बनी है आलम-ए-नापायेदार में कह दो इन हसरतों से...
न मंदिर में सनम होते, न मस्जिद में खुदा होता – नौशाद लखनवी
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न मंदिर में सनम होते, न मस्जिद में खुदा होता – नौशाद लखनवी

April 12th, 2016 | by admin
न मंदिर में सनम होते, न मस्जिद में खुदा होता हमीं से यह तमाशा है, न हम होते तो क्या होता न...
दिल की रह जाए न दिल में, ये कहानी कह लो
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दिल की रह जाए न दिल में, ये कहानी कह लो

April 6th, 2016 | by admin
खलीलुर्रहमान आज़मी दिल की रह जाए न दिल में, ये कहानी कह लो चाहे दो हर्फ़ लिखो, चाहे...
ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे
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ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे

April 6th, 2016 | by admin
राहत इन्दौरी ये ज़िन्दगी सवाल थी जवाब माँगने लगे फरिश्ते आ के ख़्वाब मेँ हिसाब माँगने...
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली- मीना कुमारी की चुनिन्दा गज़लें
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जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली- मीना कुमारी की चुनिन्दा गज़लें

April 1st, 2016 | by admin
ट्रेजिडी क्वीन मीना कुमारी जी के अभिनय का भला कौन मुरीद न होगा | पर परदे की ट्रेजिडी...
हँसती आँखों में भी नमी-सी है- जावेद अख्तर
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हँसती आँखों में भी नमी-सी है- जावेद अख्तर

March 19th, 2016 | by admin
हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है हँसती आँखों में भी नमी-सी है दिन भी चुप चाप सर झुकाये था रात की...
इक तीर मेरे सीने में मारा के हाये हाये- ग़ालिब
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इक तीर मेरे सीने में मारा के हाये हाये- ग़ालिब

March 18th, 2016 | by admin
कलकत्ते का जो ज़िक्र किया तूने हमनशीं इक तीर मेरे सीने में मारा के हाये हाये वो सब्ज़ा...
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